पाक में भारतीय पायलट की गिरफ्तारी पर बनी फिल्म में अभिनंदन के पिता ने मणिरत्नम की मदद की थी
नई दिल्ली. विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान फिलहाल पाक की कैद में हैं। उनके परिवार ने प्रधानमंत्री मोदी से इस बारे में जरूरी कदम उठाने की अपील की। अभिनंदन के पिता एस वर्तमान वायु सेना में फाइटर पायलट रहे हैं। उन्होंने मणिरत्नम की फिल्म कातरू वेलियिदाई के निर्माण में भी मदद की थी। इस फिल्म की कहानी भी वायु सेना के एक पायलट की पाकिस्तान में गिरफ्तारी पर आधारित थी।
पुंछ और राजौरी में 3 पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों के घुसने पर बुधवार को भारत ने भी जवाबी कार्रवाई की थी। वायुसेना ने घुसपैठ का जवाब देने के लिए 2 मिग-21 और 3 सुखोई-30 भेजे थे। मिग के पायलट्स ने एक पाकिस्तानी एफ-16 मार गिराया था। इस दौरान हमारा एक मिग क्रैश हो गया और पायलट विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान में बंदी बना लिए गए।
पत्नी स्क्वाड्रन लीडर पद से रिटायर हुईं
अभिनंदन की पत्नी तन्वी मारवाह स्क्वाड्रन लीडर के पद से रिटायर हो चुकी हैं। पिता एस वर्तमान चेन्नई में रहते हैं। अभी किसी को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने फोन पर भी बात करने से भी इनकार कर दिया। घर के बाहर मौजूद कुंदननाथन नाम के एक रिश्तेदार ने अभिनंदन की सकुशल रिहाई की कामना की।
पिता को 4000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव
अभिनंदन ने अपने पिता के नक्शे कदम पर चलकर 2004 में वायु सेना ज्वॉइन की थी। उनके पिता एस वर्तमान 1973 में फाइटर पायलट बने थे। वे देश के उन चुनिंदा पायलटों में शुमार हैं, जिनके पास 40 तरह के विमान और 4000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरने का अनुभव है। वे करगिल युद्ध के दौरान मिराज स्क्वाड्रन के चीफ ऑपरेशन्स ऑफिसर थे।
द्वीप काे लेकर विवाद 200 साल से भी पुराना
दोकोदो द्वीप पर दक्षिण कोरिया और जापान अपना हक जताते हैं। दक्षिण कोरिया दावा करता है कि द्वीप 17वीं सदी से उसका अंग है, वहीं जापान इसे अपने लोगों का हिस्सा बताता है। दक्षिण कोरिया के करीब होने के बावजूद विवाद के चलते यहां सिर्फ पर्यटक पहुंच पाते हैं। हालांकि, ज्वालामुखी की वजह से वह भी ज्यादा दिन यहां नहीं ठहर पाते।
खराब मौसम में बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है
किम सिन-योल पहली बार 1991 में अपने पति के साथ इस द्वीप पर आई थीं। प्राकृतिक गैसों और खनिजों से भरे होने के बावजूद बुनियादी जरूरतों की कमी के कारण तब यहां रहना काफी मुश्किल था। खराब मौसम के दौरान तो कई बार द्वीप महीनों के लिए पास के शहर से कट जाता था, लेकिन फ्री डाइविंग में महारत हासिल होने की वजह से उन्हें यहां रहने में कभी दिक्कत नहीं आई। किम के मुताबिक, कई बार उन्होंने सिर्फ मछलियां खाकर ही कई हफ्ते गुजारे।
इन दिक्कतों के बावजूद किम ने द्वीप पर रहने की ठानी और लंबे समय तक बिना किसी मदद के यहां की इकलौती रहवासी बनीं। पिछले साल पति के निधन के बावजूद भी किम इस द्वीप को नहीं छोड़ना चाहतीं। पुलिसकर्मी और लाइटहाउस ऑपरेटर कुछ दिनों के लिए यहां आने के बाद मुश्किल परिस्थितियां देख कर लौट जाते हैं, लेकिन किम बढ़ती उम्र में भी कोरियाई मेनलैंड लौटना नहीं चाहतीं।
पुंछ और राजौरी में 3 पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों के घुसने पर बुधवार को भारत ने भी जवाबी कार्रवाई की थी। वायुसेना ने घुसपैठ का जवाब देने के लिए 2 मिग-21 और 3 सुखोई-30 भेजे थे। मिग के पायलट्स ने एक पाकिस्तानी एफ-16 मार गिराया था। इस दौरान हमारा एक मिग क्रैश हो गया और पायलट विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान में बंदी बना लिए गए।
पत्नी स्क्वाड्रन लीडर पद से रिटायर हुईं
अभिनंदन की पत्नी तन्वी मारवाह स्क्वाड्रन लीडर के पद से रिटायर हो चुकी हैं। पिता एस वर्तमान चेन्नई में रहते हैं। अभी किसी को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने फोन पर भी बात करने से भी इनकार कर दिया। घर के बाहर मौजूद कुंदननाथन नाम के एक रिश्तेदार ने अभिनंदन की सकुशल रिहाई की कामना की।
पिता को 4000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव
अभिनंदन ने अपने पिता के नक्शे कदम पर चलकर 2004 में वायु सेना ज्वॉइन की थी। उनके पिता एस वर्तमान 1973 में फाइटर पायलट बने थे। वे देश के उन चुनिंदा पायलटों में शुमार हैं, जिनके पास 40 तरह के विमान और 4000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरने का अनुभव है। वे करगिल युद्ध के दौरान मिराज स्क्वाड्रन के चीफ ऑपरेशन्स ऑफिसर थे।
द्वीप काे लेकर विवाद 200 साल से भी पुराना
दोकोदो द्वीप पर दक्षिण कोरिया और जापान अपना हक जताते हैं। दक्षिण कोरिया दावा करता है कि द्वीप 17वीं सदी से उसका अंग है, वहीं जापान इसे अपने लोगों का हिस्सा बताता है। दक्षिण कोरिया के करीब होने के बावजूद विवाद के चलते यहां सिर्फ पर्यटक पहुंच पाते हैं। हालांकि, ज्वालामुखी की वजह से वह भी ज्यादा दिन यहां नहीं ठहर पाते।
खराब मौसम में बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है
किम सिन-योल पहली बार 1991 में अपने पति के साथ इस द्वीप पर आई थीं। प्राकृतिक गैसों और खनिजों से भरे होने के बावजूद बुनियादी जरूरतों की कमी के कारण तब यहां रहना काफी मुश्किल था। खराब मौसम के दौरान तो कई बार द्वीप महीनों के लिए पास के शहर से कट जाता था, लेकिन फ्री डाइविंग में महारत हासिल होने की वजह से उन्हें यहां रहने में कभी दिक्कत नहीं आई। किम के मुताबिक, कई बार उन्होंने सिर्फ मछलियां खाकर ही कई हफ्ते गुजारे।
इन दिक्कतों के बावजूद किम ने द्वीप पर रहने की ठानी और लंबे समय तक बिना किसी मदद के यहां की इकलौती रहवासी बनीं। पिछले साल पति के निधन के बावजूद भी किम इस द्वीप को नहीं छोड़ना चाहतीं। पुलिसकर्मी और लाइटहाउस ऑपरेटर कुछ दिनों के लिए यहां आने के बाद मुश्किल परिस्थितियां देख कर लौट जाते हैं, लेकिन किम बढ़ती उम्र में भी कोरियाई मेनलैंड लौटना नहीं चाहतीं।
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