शैक्षणिक संस्थानों में 200 पॉइंट रोस्टर फिर लागू होगा, कैबिनेट से अध्यादेश को मंजूरी
नई दिल्ली. मोदी कैबिनेट ने शैक्षणिक संस्थानों में नियुक्ति में आरक्षण लागू करने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले के बाद नियुक्तियों में आरक्षण के लिए दोबारा 200 पॉइंट रोस्टर लागू होगा। इसके मुताबिक, अब यूनिवर्सिटी और कॉलेज को यूनिट माना जाएगा। यूजीसी ने मार्च 2018 में 13 पॉइंट रोस्टर लागू किया था, इसमें विभाग को यूनिट माना जाता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अप्रैल 2017 में 13 रोस्टर लागू करने का फैसला दिया था
यूजीसी ने पिछले साल मार्च में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अप्रैल 2017 के फैसले को लागू किया था। इसके मुताबिक, पदों पर आवंटन की गिनती करते वक्त एक विभाग को यूनिट के तौर पर लिया जाता है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने मानव संसाधन मंत्रालय की याचिका को खारिच कर दिया था, जो हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। जावड़ेकर ने 11 फरवरी को लोकसभा में कहा था कि सरकार पुनर्याचिका रद्द होने के बाद अध्यादेश ला सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि सरकार संस्थानों में रिजर्वेशन रोस्टर को फिर से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। जावड़ेकर ने कहा था कि सरकार 200 पॉइंट रोस्टर लागू करेगी, जिससे पदों पर आवंटन की गिनती करते वक्त यूनिवर्सिटी या कॉलेज को यूनिट के तौर पर माना जाएगा, न कि किसी एक विभाग को।
क्या है 13 पॉइंट रोस्टर?
यूजीसी के आदेश के बाद से अभी तक 13 पॉइंट रोस्टर से यूनिवर्सिटी में अध्यापकों की नियुक्तियां हो रही हैं। इसके मुताबिक, यूनिवर्सिटी या कॉलेज को यूनिट नहीं माना जाएगा, बल्कि एक विभाग को यूनिट माना जाएगा। अगर किसी विभाग में चार नियुक्तियां निकलती हैं तो तीन स्थानों पर सामान्य और चौथे स्थान पर ओबीसी उम्मीदवार को मौका मिलेगा।
अगली बार जब नियुक्तियां निकलेंगी तो इसे पांच के बाद से जोड़ा जाएगा। 7 वें स्थान पर एससी, आठवें स्थान पर ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार को मौका मिलेगा। इसे रजिस्टर में दर्ज करना होगा। यह प्रक्रिया 13 पॉइंट तक चलेगी। एसटी वर्ग के उम्मीदवार को तभी मौका मिलेगा, जब विभाग में 14 पद होंगे। वहीं, 200 पॉइंटरोस्टर में यूनिवर्सिटी और कॉलेज को यूनिट मानकर आरक्षण दिया जाता है। इसमें प्रक्रिया 200 पॉइंट तक चलती है।
नई दिल्ली. संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित आतंकियों की लिस्ट से मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद का नाम हटाने से इनकार कर दिया है। भारत सरकार के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि जमात-उद-दावा (जेयूडी) के चीफ हाफिज ने यूएन से अपना नाम इस लिस्ट से हटाने की अपील की थी।
भारत ने मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की
यह फैसला उस वक्त आया है, जह संयुक्त राष्ट्र की सेंक्शन कमेटी से अपील की गई है कि जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाया जाए। पुलवामा हमले के बाद भारत समेत अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने यूएन से यह अपील की। जैश ने ही इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।
हाफिज लश्कर-ए-तैयबा का को-फाउंडर भी है। सूत्र ने बताया- यूएन ने उसे लिस्ट में बनाए रखने का फैसला तब लिया है, जब भारत ने उसकी गतिविधियों के संबंध में बेहद गोपनीय जानकारियां और साक्ष्य यूएन को मुहैया कराए हैं। इस फैसले की जानकारी हाफिज के वकील हैदर रसूल मिर्जा को इसी हफ्ते दे दी गई है।
जमात-उद-दावा भी यूएन की प्रतिबंधित संगठनों की लिस्ट में है। मुंबई हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समिति ने 10 दिसंबर 2008 को हाफिज सईद पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस आतंकवादी हमले में 166 लोगों की जान गई थी।
अपने वकील मिर्जा के जरिए सईद ने 2017 में यूएन में प्रतिबंध हटाने की अपील की थी। इस दौरान हाफिज पाकिस्तान में नजरबंद था। इस अपील का भारत के अलावा यूएस, यूके और फ्रांस ने भी विरोध किया था। इन देशों में भी हाफिज को प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि, पाकिस्तान ने इस पर किसी तरह का विरोध दर्ज नहीं कराया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अप्रैल 2017 में 13 रोस्टर लागू करने का फैसला दिया था
यूजीसी ने पिछले साल मार्च में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अप्रैल 2017 के फैसले को लागू किया था। इसके मुताबिक, पदों पर आवंटन की गिनती करते वक्त एक विभाग को यूनिट के तौर पर लिया जाता है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने मानव संसाधन मंत्रालय की याचिका को खारिच कर दिया था, जो हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। जावड़ेकर ने 11 फरवरी को लोकसभा में कहा था कि सरकार पुनर्याचिका रद्द होने के बाद अध्यादेश ला सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि सरकार संस्थानों में रिजर्वेशन रोस्टर को फिर से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। जावड़ेकर ने कहा था कि सरकार 200 पॉइंट रोस्टर लागू करेगी, जिससे पदों पर आवंटन की गिनती करते वक्त यूनिवर्सिटी या कॉलेज को यूनिट के तौर पर माना जाएगा, न कि किसी एक विभाग को।
क्या है 13 पॉइंट रोस्टर?
यूजीसी के आदेश के बाद से अभी तक 13 पॉइंट रोस्टर से यूनिवर्सिटी में अध्यापकों की नियुक्तियां हो रही हैं। इसके मुताबिक, यूनिवर्सिटी या कॉलेज को यूनिट नहीं माना जाएगा, बल्कि एक विभाग को यूनिट माना जाएगा। अगर किसी विभाग में चार नियुक्तियां निकलती हैं तो तीन स्थानों पर सामान्य और चौथे स्थान पर ओबीसी उम्मीदवार को मौका मिलेगा।
अगली बार जब नियुक्तियां निकलेंगी तो इसे पांच के बाद से जोड़ा जाएगा। 7 वें स्थान पर एससी, आठवें स्थान पर ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार को मौका मिलेगा। इसे रजिस्टर में दर्ज करना होगा। यह प्रक्रिया 13 पॉइंट तक चलेगी। एसटी वर्ग के उम्मीदवार को तभी मौका मिलेगा, जब विभाग में 14 पद होंगे। वहीं, 200 पॉइंटरोस्टर में यूनिवर्सिटी और कॉलेज को यूनिट मानकर आरक्षण दिया जाता है। इसमें प्रक्रिया 200 पॉइंट तक चलती है।
नई दिल्ली. संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित आतंकियों की लिस्ट से मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद का नाम हटाने से इनकार कर दिया है। भारत सरकार के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि जमात-उद-दावा (जेयूडी) के चीफ हाफिज ने यूएन से अपना नाम इस लिस्ट से हटाने की अपील की थी।
भारत ने मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की
यह फैसला उस वक्त आया है, जह संयुक्त राष्ट्र की सेंक्शन कमेटी से अपील की गई है कि जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाया जाए। पुलवामा हमले के बाद भारत समेत अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने यूएन से यह अपील की। जैश ने ही इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।
हाफिज लश्कर-ए-तैयबा का को-फाउंडर भी है। सूत्र ने बताया- यूएन ने उसे लिस्ट में बनाए रखने का फैसला तब लिया है, जब भारत ने उसकी गतिविधियों के संबंध में बेहद गोपनीय जानकारियां और साक्ष्य यूएन को मुहैया कराए हैं। इस फैसले की जानकारी हाफिज के वकील हैदर रसूल मिर्जा को इसी हफ्ते दे दी गई है।
जमात-उद-दावा भी यूएन की प्रतिबंधित संगठनों की लिस्ट में है। मुंबई हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समिति ने 10 दिसंबर 2008 को हाफिज सईद पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस आतंकवादी हमले में 166 लोगों की जान गई थी।
अपने वकील मिर्जा के जरिए सईद ने 2017 में यूएन में प्रतिबंध हटाने की अपील की थी। इस दौरान हाफिज पाकिस्तान में नजरबंद था। इस अपील का भारत के अलावा यूएस, यूके और फ्रांस ने भी विरोध किया था। इन देशों में भी हाफिज को प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि, पाकिस्तान ने इस पर किसी तरह का विरोध दर्ज नहीं कराया था।
Comments
Post a Comment