आतंकी 16 साल बाद फिर खड़ा हुआ, इसके समापन के लिए संन्यासी खड़े हैं: प्रज्ञा ठाकुर

सीहोर. भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने गुरुवार को कहा कि आतंकी के समापन के लिए संन्यासी मैदान में आए हैं। मैं उस आतंकी के कर्मों का प्रत्यक्ष प्रमाण आपके सामने हूं। 16 साल पहले उमा भारती ने उसे सत्ता से बाहर कर दिया था। प्रज्ञा ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि अबकी बार हम उसका ऐसा हाल करेंगे कि वो फिर से खड़ा नहीं हो सकेगा। लोकसभा में चुनाव में प्रज्ञा का मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से है।

प्रज्ञा ठाकुर ने सीहोर की सभा में कहा, ''उसने प्रदेश के लोगों को बेरोजगार कर दिया। यहां के गन्ना किसानों की हालत आज कैसी है इसके पीछे सिर्फ एक व्यक्ति जिम्मेदार है। यहां जो उद्योग थे उन्हें वो अपने क्षेत्र में ले गया और यहां के लोग बेरोजगार हो गए।''

महिला उत्पीड़न का प्रत्यक्ष प्रमाण हूं: साध्वी

साध्वी प्रज्ञा मंगलवार को नामांकन दाखिल कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था, ''मैं महिला उत्पीड़न का प्रत्यक्ष प्रमाण हूं। मुझे अलग-अलग तरह से प्रताड़ित किया गया। जब सनातन संस्कृति पर हमला होता है तो संतों को आगे आना पड़ता है। इसलिए मैं भोपाल से चुनाव लड़ रही हूं। उन्होंने (कांग्रेस) भगवा को आतंकवाद कहा। हिंदुत्व विकास का पर्याय है।''

प्रज्ञा के खिलाफ दर्ज हो चुकी है एफआईआर

भाजपा से उम्मीदवारी तय होने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने कहा था कि यह धर्म युद्ध है और इसमें उनकी जीत सुनिश्चित है। इसके बाद उन्होंने 26/11 मुंबई हमले के शहीद हेमंत करकरे को लेकर कहा था कि करकरे का अंत उनके शाप से हुआ। साध्वी ने फिर दावा किया कि अयोध्या में विवादित ढांचा उन्होंने ढहाया था। राम मंदिर बनाने से कोई नहीं रोक सकता है। आचार संहिता उल्लंघन के मामले में चुनाव आयोग दो बार उन्हें नोटिस दे चुका है। बाबरी मस्जिद पर विवादित बयान को लेकर भोपाल में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है।

जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा था कि न्यायालय हम सब से ऊपर है। अगर सुप्रीम कोर्ट में कोई फिक्सिंग रैकेट चल रहा है तो हम इसकी जड़ तक जाएंगे। हम जानना चाहते हैं कि फिक्सर कौन है? बेंच ने आईबी चीफ, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और सीबीआई डायरेक्टर को चैम्बर में आकर मिलने के निर्देश दिए थे। इससे पहले जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली आंतरिक जांच समिति ने सीजेआई पर आरोप लगाने वाली महिला को नोटिस जारी कर 26 अप्रैल को तलब किया।

वकील की सुरक्षा जारी रखने का निर्देश
वकील उत्सव ने अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा होने की बात अदालत से कही थी। इसके बाद मंगलवार को जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को उत्सव को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराए जाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा कि उत्सव की सुरक्षा जारी रखें।

वकील का दावा- आरोप लगाने वाली महिला की पैरवी के लिए मिला 1.5 करोड़ का ऑफर

उत्सव बैंस ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि सीजेआई के खिलाफ आरोप लगाने वाली महिला की ओर से पैरवी करने के लिए अजय नाम के व्यक्ति ने उसे 1.5 करोड़ रुपए का ऑफर दिया था। 
उत्सव ने बताया- इस व्यक्ति ने प्रेस क्लब में सीजेआई के खिलाफ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस अरेंज करने के लिए भी कहा था।

उत्सव ने यह भी दावा किया कि एक बेहद विश्वसनीय व्यक्ति ने उन्हें बताया कि एक कॉरपोरेट शख्सियत ने अपने पक्ष में फैसला करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक जज से संपर्क किया था। जब वह असफल रहा तो उस शख्स ने उस जज की अदालत से केस ट्रांसफर करवाने की कोशिश की।

हलफनामे में उत्सव ने कहा- जब यह कॉरपोरेट शख्सियत असफल रही तो "कथित फिक्सर' के साथ मिलकर सीजेआई के खिलाफ झूठे आरोप की साजिश रची ताकि उन पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा सके।

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