तीन तलाक़ बिल को बीजेपी ने राज्यसभा में बिना बहुमत कैसे पास कराया

राज्यसभा में नरेंद्र मोदी सरकार के पास बहुमत नहीं होने के बावजूद मंगलवार को तीन तलाक़ बिल पास हो गया.

यह सरकार की दूसरी बड़ी सफलता है. इससे पहले पिछले हफ़्ते आरटीआई संशोधन बिल पास हुआ था. दिलचस्प है कि मोदी सरकार के दोनों बिलों से विपक्ष सहमत नहीं था फिर भी रोकने में नाकाम रहा.

तीन तलाक़ पर भी मंगलवार को विपक्ष राज्यसभा में बँट गया और बिल थोड़े बहुमत से पास हो गया. राज्यसभा में सरकार के फ़्लोर मैनेजमेंट के सामने विपक्ष बुरी तरह से बिखर गया.

कांग्रेस मांग कर रही थी कि बिल को संसदीय समिति के पास भेजा जाए. लेकिन केंद्र सरकार राज्यसभा में इस बिल को 99-84 वोट से पास कराने में सफल रही.

बिल को सेलेक्ट कमिटी में भी भेजने पर मतदान हुआ लेकिन इसमें भी सरकार के पक्ष में 100 वोट पड़े और विपक्ष का साथ 84 सांसदों ने ही दिया.

तीन तलाक़ बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, ''पूरे देश के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है. आज करोड़ों मुस्लिम माताओं-बहनों की जीत हुई है और उन्हें सम्मान से जीने का हक़ मिला है. सदियों से तीन तलाक़ की कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज न्याय मिला है. इस ऐतिहासिक मौक़े पर मैं सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूँ.''

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी बिल पास होने पर मंगलवार को कहा, ''राज्यसभा में मुस्लिम वीमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज) बिल के पारित होने से 'तीन तलाक़' की अन्यायपूर्ण परंपरा के प्रतिबंध पर संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी हो गई है. यह महिला-पुरुष समानता के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है; पूरे देश के लिए संतोष का क्षण है.''

एनडीए को संख्या बल का अहसास उसी वक़्त हो गया था जब एआईएडीएमके और नीतीश कुमार की जेडीयू मतदान से वॉकआउट कर गई. हालांकि जेडीयू इस बिल के विरोध में थी.

इन दोनों पार्टियों के राज्यसभा में कुल 19 सांसद हैं और इनके वॉकआउट करते ही विपक्ष की उम्मीदें धराशायी हो गई थीं. बीजू जनता दल के राज्यसभा में सात सांसद हैं और इन्होंने तीन तलाक़ पर सरकार के पक्ष में मतदान किए.

बिल के पास होने पर केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ''भारत एक धर्मनिरेपक्ष देश है. 2013 में तीन तलाक़ की एक पीड़िता सुप्रीम कोर्ट गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि यह एकतरफ़ा और असंवैधानिक है. जिसे क़ुरान में भी ग़लत बताया गया है वो हमारे लिए भी अवैध है.''

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और राष्ट्रीय जनता दल के नेता इस बिल को पक्षपाती, असंवैधानिक और एकतरफ़ा बता रहे थे. बिल पास होने के बाद इन पार्टियों के नेताओं ने कहा कि सरकार ने जुगाड़ के बहुमत से इस बिल को पास किया है.

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के सीनियर नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने बिल पास होने पर कहा, ''भारत के मुसलमानों की तुलना दूसरे देशों के मुसलमानों से नहीं की जा सकती. पत्नी की शिकायत पर अगर पति जेल जाता है और आप सोचते हैं कि वो जेल से बाहर आएगा तो दोनों शांति से रहेंगे? इस बिल से न तो तलाक़शुदा महिला और न ही आश्रित बच्चों का कुछ भला होगा.''

सरकार का कहना है कि इस बिल के क़ानून बन जाने से विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होगी और इनके पति मनमाने तरीक़े से तीन बार तलाक़ कहकर शादी तोड़ नहीं पाएंगे.

बिल में प्रावाधान है कि तीन तलाक़ देने वालों को पुलिस बिना वॉरंट के ही गिरफ़्तार कर लेगी और इसमें जुर्माने के साथ तीन साल की क़ैद भी हो सकती है. इस बिल को लोकसभा में पिछले हफ़्ते ध्वनिमत से पास किया गया था.

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